क्रिकेट में Hotspot क्या है और यह कैसे काम करता है? Hotspot Technology in Cricket

अगर आप cricket match देखते हैं तो आपने cricket में उपयोग होने वाली टेक्नोलॉजी HotSpot के बारे में जरूर सुना होगा। कई बार आपके मन में यह प्रश्न भी आया होगा कि हॉटस्पॉट क्या है?हॉटस्पॉट कैसे काम करता है? इस पोस्ट में इसके बारे में डिटेल से बताया गया है। hotspot technology in cricket

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अम्पायर्स के decisions को सटीक बनाने तथा क्रिकेट में बेहतर रिजल्ट पाने के लिए ICC ने क्रिकेट मैच में बहुत सारी technologies के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है। इन technologies के इस्तेमाल से मैैच इंटरेस्टिंग और इनका प्रसारण बेेहतरी से होता है।

HotSpot क्या है – What is HotSpot in Hindi?

हॉटस्पॉट infra-red imaging system पर आधारित एक टेक्नोलॉजी है जिसका क्रिकेट में उपयोग इस बात को निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि गेंद बल्ले से लगी है या नहीं।  

यह तकनीक आस्ट्रेलियन कम्पनी BBG Sports द्वारा introduce की गई थी जिसका इस्तेमाल पहली बार सन् 2006 में एशेज सीरीज के दौरान किया गया था।  

Hotspot के लिए लगे कैमरे मैच को कैप्चर करते है और ब्लैक एंड व्हाइट में विडियो फुटेज दिखाते है। जहाँ बैट और बॉल का सम्पर्क होता है वहां पर white spot बन जाता है जिससे अम्पायर आसानी से सही डिसीजन दे पाते है।  

Hotspot कैसे काम करता है?

हॉटस्पॉट टेक्नोलॉजी के लिए क्रिकेट मैदान में इन्फ्रा रेड कैमरे लगे होते हैं। यह हीट सिग्नेचर (thermal wave) पर आधारित है।  

जब बॉल बैट, ग्लव्स या पैड पर लगती है तो इन्फ्रा-रेड कैमरे हीट फ्रिक्शन को रिकॉर्ड करते है जिससे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि बॉल बैट से लगी है या कहीं और क्योंकि जहांँ पर बॉल लगी है, वहाँँ पर white spot बन जाता है।  

इस कारण हॉटस्पॉट से यह clearly visible हो जाता है कि ball का contact कहाँ हुआ है और अम्पायर इसे देखकर easily अपना डिसीजन दे सकते है।  

हॉटस्पॉट तथा स्निकोमीटर में अंतर यह है कि स्निकोमीटर साउंड वेव्स पर निर्भर है जबकि हॉट स्पॉट हीट सिग्नेचर पर डिपेंड है।

I hope आपको यह आर्टिकल क्रिकेट टेक्नोलॉजी hotspot क्या है? अच्छा लगा होगा।

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