What is Hawk Eye Technology in Hindi

इस पोस्ट में हम जानेंगे कि Hawk Eye क्या है, Hawk-Eye कैसे काम करती है और इसका कौन-कौन से खेलों में किस तरह उपयोग किया जाता है?

अगर आप खेल प्रेमी हैं और आपने क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेलों को करीब से देखा है तो आपने हॉक आई टेक्नोलॉजी के बारे में जरूर सुना होगा।

हॉक आई क्या है – What is Hawk Eye Technology in Sports

hawk eye technology in sports hindi

Hawk Eye टेक्नोलॉजी एक ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम है जो बॉल को 5 mm की accuracy के साथ ट्रैक करता है।  

इसके लिए मैदान में लगे 6 कैमरे बॉल को track करते है और फिर इन 6 कैमरों के विडियोज को रियल टाइम में combine कर सिस्टम 3D इमेज/विडियो जनरेट करता है जो बॉल के रास्ते/पाथ को दर्शाता है।  

इस टेक्नोलॉजी को पॉल हॉकिन्स ने डेवलप किया था।

इसका पहली बार इस्तेमाल सन् 2001 में Channel 4 द्वारा इंग्लैंड-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच में सिर्फ टेलीविजन प्रसारण के लिए किया गया था लेकिन आज यह क्रिकेट, टेनिस जैसे खेलों में बॉल ट्रैकिंग के जरिये डिसीजन में बहुत सहायक है।

Cricket में इस टेक्नोलॉजी का उपयोग LBW डिसीजन में किया जाता है क्योंकि इसके द्वारा बॉल के पैर से लगने के बाद यह पता लगाया जा सकता है कि बॉल स्टम्प में जा रही थी या नहीं।

इसके अलावा हॉक आई का उपयोग क्रिकेट में गेंदबाजों के बॉलिंग का एनालिसिस (जैसे लाइन, लेंथ, स्पिन, स्विंग, उछाल) करने में किया जाता है।

Hawk-Eye कैसे काम करती है (How does Hawk Eye Work)

इस तकनीक में मैदान में अलग-अलग एंगल्स पर 6 कैमरा (कुछ खेलों में अधिक) लगे होते हैं।

सिस्टम/सॉफ्टवेयर इन सभी कैमरों द्वारा भेजे गये प्रत्येक फ्रेम को analyze कर रियल टाइम में 3D फुटेज में ग्राफिक इमेज तैयार करता है।

फिर इस ग्राफिक इमेज/विडियो को देखकर बॉल की tracking को tv viewers, umpires तक पहुंचाया जाता है।

साथ ही सिस्टम में संग्रहित डेटा के आधार पर खिलाड़ियों के बॉलिंग को ball-to-ball comparison तथा उनके आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है।

Cricket में हॉक आई का प्रयोग

क्रिकेट में यह तकनीक एलबीडब्ल्यू के समय बेहद कारगर साबित होती है क्योंकि इससे बॉल के रास्ते को ट्रैक किया जाता है तथा यह पता लगाया जाता है कि बॉल स्टंप की लाइन में थी या नहीं।

अगर बल्लेबाज को लगता है कि उसे गलत एलबीडब्ल्यू आउट दिया गया है तो वह डीआरएस के जरिए यह जान सकता है कि वो आउट है या नहीं।

डीआरएस में हॉक आई से बॉल के रास्ते को predict किया जाता है कि बॉल स्टम्प लाइन में है या नहीं। ठीक इसी तरह गेंदबाज भी अंपायर के डिसीजन को चैलेंज देखकर यह जान सकता है कि बॉल स्टंप की लाइन में थी और बल्लेबाज आउट है।

इसके अलावा इस तकनीक का उपयोग गेंदबाजों के बॉलिंग मैप का विश्लेषण तथा तुलना करने में किया जाता है।

साथ ही अपने क्रिकेट मैच के दौरान छक्के, चौकों तथा रनों का मैदान मैप (Wagon Wheels) देखा होगा। यह भी हॉक आई टेक्नोलॉजी की देन है। मैच में बल्लेबाजों द्वारा खेली गई बॉलों के लाल, पीले, हरे, सफेद रंगों में जो डॉट देखते हैं वो भी हॉक आई टेक्नोलॉजी के उपयोग से हैं।

क्रिकेट के अलावा इसका use फुटबॉल में गोल लाइन को ट्रैक करने, टेनिस में भी बॉल को ट्रैक करने तथा कई अन्य खेलों में किया जाता है।

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