ज्वालामुखी और इसके प्रकार – ज्वालामुखी कैसे बनता है

ज्वालामुखी,  What is Volcano in Hindi

ज्वालामुखी क्या है – What is Volcano in Hindi

ज्वालामुखी भूपटल पर वो प्राकृतिक क्षेत्र या दरार है जिससे होकर पृथ्वी के अंदर का पिघला पदार्थ, गैस या भाप, राख इत्यादि बाहर निकलते है।

ज्वालामुखी के प्रमुख अंग

ज्वालामुखी में मुख्य रूप से यह अंग होते है:

  • ज्वालामुख,
  • ज्वालामुखी शंकु,
  • ज्वालामुखी बिन्दु,
  • कालेरा इत्यादि।

ज्वालामुखी कितने प्रकार की होती है – Types of Volcano in Hindi)

ज्वालामुखी को मुख्यतः दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है।  

  1. सक्रियता की अवधि के आधार पर।
  2. विस्फोट की तीव्रता के आधार पर।

1. सक्रिय या जाग्रत ज्वालामुखी (Active Volcanoes)

जिन ज्वालामुखियों से सदैव गैस, लावा निकलता रहता हो यानि कि उनमें अक्सर विस्फोट होता रहता है, सक्रिय ज्वालामुखी कहलाते है।

प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखी – सिसली का एटना, इटली का विसुवियस, मैक्सिको का पोपोकैटपेटल, कैलिफॉर्निया का लासेन, इक्वेडोर का कोटोपैक्सी।

2. सुषुप्त या निद्रित ज्वालामुखी (Dormant Volcanoes)

कुछ ज्वालामुखी उद्गार के वक्त शांत पड़ जाते है तथा उनमें पुनः उद्गार के लक्षण नहीं दिखते है परंतु अचानक विस्फोट हो जाता है, ऐसे ज्वालामुखी प्रसुप्त/सुषुप्त ज्वालामुखी कहलाते है।  

3. शांत या मृत ज्वालामुखी (Extinct or dead Volcanoes)

वो ज्वालामुखी जो युगों से शांत है और जिनका विस्फोट एकदम बंद हो गया है, शांत ज्वालामुखी कहलाते है। इनके मुख में जल आदि भरने से झीलों का निर्माण हो जाता है और पुनः इनके उद्गार की संभावना नहीं रहती है।

शांत ज्वालामुखी के उदाहरण – एंडीज पर्वत पर स्थित एकांकगुआ ( विश्व की सबसे ऊंची शांत ज्वालामुखी)  

ज्वालामुखी कैसे बनती है – How do Volcano Form in Hindi

भूवैज्ञानिकों के अध्ययन से पता चलता है कि भूसतह के नीचे अलग-अलग गहराइयों पर कुछ रेडियोधर्मी खनिज मौजूद है जिनके विखंडन से गर्मी उत्पन्न होती है। इस गर्मी से पृथ्वी के बीच मौजूद चट्टानें एवं अन्य पदार्थ तपते रहते है जिससे भूपटल के निचले स्तरों में तापमान चट्टानों के गलनांक से ज्यादा हो जाता है।

साथ ही गहराई के साथ दाब भी बढ़ता जाता है। हालांकि अधिक दाब के कारण चट्टानें उच्च तापमान पर भी द्रवित नहीं होती है लेकिन कभी-कभी ताप तथा दाब के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है जिससे चट्टानें द्रवित होकर मैग्मा का निर्माण करती है और अविलंब उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर दरारों से भूसतह पर आ जाता है।

यही ज्वालामुखी उत्पत्ति का सिद्धांत है। हालांकि अलग-अलग वैज्ञानिकों की इस सिद्धांत पर अलग-अलग राय है और कई वैज्ञानिक ज्वालामुखी के पैदा होने का इससे अलग सिद्धांत भी बताते है।

ज्वालामुखी बनने के कारण

ज्वालामुखी के उत्पन्न होने के निम्न कारण बताये जाते है…

  1. भूगर्भीय ताप का अधिक होना।
  2. अत्यधिक ताप और दाब के असंतुलन के कारण लावा की उत्पत्ति।
  3. गैस तथा वाष्प की उत्पत्ति।
  4. लावा का ऊपर की ओर प्रवाहित होना।

ज्वालामुखी के प्रभाव

ज्वालामुखी का पृथ्वी और मनुष्यों पर कई प्रकार के प्रभाव हो सकते है। यह इसकी तीव्रता पर निर्भर करता है कि ज्वालामुखी का फूटना कितना नुकसानदायक साबित होगा।

यह कुछ इफेक्ट्स है जो ज्वालामुखी के फूटने पर हो सकते है:

  • जवालामुखी का फूटना मौसम बदल सकता है और इस वजह से बारिश, गड़गड़ाहट और बिजली गिर सकती है।
  • ज्वालामुखियों का जलवायु पर दीर्घकालिक प्रभाव भी हो सकता है जिससे दुनिया (वातावरण) ठंडी हो सकती है।
  • तेज-तर्रार लावा ज्वालामुखी क्षेत्र के नज़दीकी लोगों के लिए बेहद नुकसान हो सकता है। राख का फैलना सांस लेना मुश्किल कर सकता है। लोग अपने घरों को छोड़ने पर मज़बूर हो सकते है।
  • ज्वालामुखी का लावा पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक है। इसे इससे समझा जा सकता है कि 1980 में माउंट सेंट हेलेंस ज्वालामुखी ने लगभग 11000 हार्स (घोड़े), 6000 हिरण, 200 काले भालू और 15 पहाड़ी शेरों सहित अनुमानित 24,000 जानवरों को मार डाला था।

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