अप्रैल फूल क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास

कहा जाता है कि अच्छी सेहत के लिए हास्य का होना जरूरी है और यह सच भी है। यूं तो दैनिक जीवन में हंसी-मजाक का कार्यक्रम चलता रहता है लेकिन पूरी दुनिया में एक ऐसा दिन है जिसे मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइये जानते है अप्रैल फूल डे इतिहास के बारे में april fool day history in hindi

मूर्ख दिवस को अप्रैल फूल डे भी कहा जाता है। यह अप्रैल महिने के पहले दिन यानि 1 अप्रैल को मनाया जाता है। अगर हम सामान्य दिनों में किसी व्यक्ति को बेवकूफ बनाएं तो वो नाराज हो सकता है लेकिन इस दिन यानि मूर्ख दिवस को ऐसा करने पर वो बुरा नहीं मानता है।

मूर्ख दिवस पर मूर्ख या बेवकूफ बनने वाला व्यक्ति अप्रैल फूल कहलाता है। इस दिन अच्छे-खासे समझदार व ऊंचे पद के व्यक्ति भी अप्रैल फूल बनाने, बनने या कहलाने में हिचक महसूस नहीं करते हैं। चलिए जानते हैं अपने आप में रोचक दिन अप्रैल फूल के इतिहास के बारे में…

एक अप्रैल मूर्ख दिवस का इतिहास, April Fool Day History in Hindi

April Fool Day History in Hindi

अप्रैल फूल डे के बारे में आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं है। इसके पीछे कई कहानियां हैं और बताया जाता है कि इन कहानियों के कारण आज पूरे विश्व में अप्रैल फूल डे को मनाया जाता है।

कई लोगों का मत है कि अप्रैल फूल का संबंध फ्रेंच कैलेंडर में हुए परिवर्तन से है जबकि कई इसे इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय की सगाई से रिलेट करते हैं। इसके अलावा और भी बहुत सारे फैक्ट है जिनसे यह बताया जाता है कि अप्रैल फूल की शुरुआत हुई थी।

इस पोस्ट में हम सिर्फ उन्हीं कहानियों/तथ्यों के बारे में बात करेंगे जो अप्रैल फूल मनाने के कारण के लिए ज्यादा प्रचलित है।

1. फ्रेंच कैलेण्डर में परिवर्तन से मूर्ख दिवस की उत्पत्ति

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि अप्रैल फूल दिवस का संबंध सन् 1582 से है।  

1582 से पहले फ्रांस में लोग जूलियन कैलेंडर का अनुसरण करते थे और इस कैलेंडर के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से होती थी लेकिन 1582 में फ्रांस शासकों तथा चर्च ने जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रोगेरियन कैलेंडर को लागू कर दिया और इस नये कैलेंडर अनुसार नया वर्ष 1 जनवरी से शुरू होता था।

वो लोग जिन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी, वे 1 अप्रैल को ही नया वर्ष मनाते थे या कुछ लोग जो जानकारी होने के बावजूद 1 जनवरी से लेकर 1 अप्रैल तक नया वर्ष मनाते थे, वो हास्य के पात्र बन गए। उन्हें मूर्ख समझ कर मजाक बनाया जाने लगा। उनकी पीठ पर ‘पेपर फिश’ लगाकर उन्हें आसानी से पकड़ी जाने वाली मछली या भोले व्यक्ति कहा जाने लगा।

माना जाता है कि तब से ही अप्रैल फूल डे की शुरुआत हो गई थी।

2. चॉसर की कैंटरबरी टेल्स के कारण अप्रैल फूल की उत्पत्ति

इस कहानी के अनुसार अप्रैल फूल के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय तथा बोहेमिया की राजकुमारी एनी की सगाई 32 मार्च 1381 को रखी गई थी.

इसे वहां के लोगों ने सच मान लिया जबकि 32 मार्च तो होती नहीं। लोग इसे 32 मार्च यानि 1 अप्रैल से जोड़कर देखते हैं और अप्रैल फूल डे के शुरू होने का कारण बताते हैं।

3. अन्य कहानियां जिन्हें अप्रैल फूल डे के पीछे का कारण माना जाता है

पुराने समय में रोम के लोग अत्तिस देवता की पूजा जिसे हिलारिया कहा जाता है, के दौरान अजीब तरह का पहनावा तथा मास्क रखते थे और एक दूसरे से जमकर मजाक मस्ती करते थे। इस कारण इसे भी अप्रैल फूल के इतिहास से जोड़ा जाता है।

एक और कहानी है जिसमें यह कहा जाता है कि इंग्लैंड के लोगों को पत्र लिखकर ‘टावर ऑफ़ लंदन’ में शेरों की धुलाई (कहीं पर सफेद गधों की धुलाई) देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। जब हजारों की संख्या में लोग वहां टावर के पास इकट्ठे हुए तो बताया गया कि ऐसा कुछ नहीं है, उन्हें मूर्ख बनाया गया है। उस दिन 1 अप्रैल था, इसे भी मूर्ख दिवस का कारण बताया जाता है।

इसके अलावा और भी कई कहानियां हैं जिनमें अप्रैल फूल डे के इतिहास के बारे में बताया गया है लेकिन किसी भी कहानी की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। मूर्ख दिवस पश्चिमी देशों की देन है जो आज पूरे विश्व में फैल चुका है और 1 अप्रैल को लोगों के चेहरे पर हंसी का कारण बनता है।

चाहे अप्रैल फूल डे का इतिहास जो भी हो लेकिन इस दिन जमकर मस्ती मजाक करें। लोगों के चेहरे पर हंसी लायें लेकिन इस बात का ध्यान रखते हुए कि किसी का कोई नुकसान ना हो। मुस्कुराते रहिये…Happy April Fool Day!

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